नई दिल्ली। NEET (UG) परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि इंफोसिस के सह-संस्थापक और तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित की जाएगी। यह समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सुझाव देगी।
नंदन नीलेकणि देश के प्रमुख उद्योगपति और डिजिटल परिवर्तन के अग्रणी चेहरों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1981 में एन.आर. नारायण मूर्ति और सहयोगियों के साथ इंफोसिस की स्थापना की थी तथा 2002 से 2007 तक कंपनी के CEO रहे। वर्ष 2009 से 2014 तक वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष रहे और आधार परियोजना का नेतृत्व किया। डिजिटल इंडिया और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
टास्क फोर्स में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अंकिता करवाल और अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, प्रश्नपत्र लीक रोकने और परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय सुझाएगी। सरकार का मानना है कि इसकी सिफारिशों से NEET, JEE समेत राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। नंदन नीलेकणि को उनके योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।
Continue With Google
Comments (0)