भोपाल लिखंदरा आर्ट सोसायटी एवं सिनेकारी द्वारा लिटिल बैले ट्रूप (LBT) सभागार, भोपाल में श्रीहर्ष विरचित प्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘नागानन्दम्’ की प्रस्तुति आयोजित की गई। नाटक की प्रस्तुति केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर के नाट्यशास्त्र अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र के अन्तर्गत नवगठित ‘संस्कृत रंगमण्डल’ द्वारा की गई। इसका निर्देशन नाट्यशास्त्र की विदुषी एवं संस्कृत रंगमण्डल की समन्वयक डॉ. संगीता गुन्देचा ने किया।

‘नागानन्दम्’ में बोधिसत्त्व जीमूतवाहन की कथा के माध्यम से त्याग, करुणा, अहिंसा, परोपकार और प्राणीमात्र के कल्याण जैसे उदात्त मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। वर्तमान हिंसा, संघर्ष और अशान्ति के दौर में नाटक का करुणा एवं अहिंसा का संदेश विशेष रूप से समसामयिक और प्रासंगिक रहा।

प्रस्तुति की प्रमुख विशेषता भरतमुनि प्रणीत ‘नाट्यशास्त्र’ की अभिनय-पद्धति का रंगमंचीय प्रयोग रही। आंगिक, वाचिक, सात्त्विक एवं आहार्य अभिनय के साथ हस्त-मुखाभिनय, देहभाषा, वेशभूषा एवं रंगमंचीय विन्यास में शास्त्रीय नाट्यपरम्परा को जीवंत रूप प्रदान किया गया।

प्रस्तुति के संगीत का निर्देशन श्री उमेश तर्कस्वार ने किया, जबकि नृत्य-संयोजन श्रीमती अल्पना वाजपेयी ने किया। नाटक की वस्त्र-सज्जा श्री संजीव सिंह परमार द्वारा की गई। संगीत, नृत्य और वस्त्र-सज्जा के प्रभावी संयोजन ने नाट्यशास्त्रीय प्रस्तुति को विशिष्ट रंगमंचीय स्वरूप प्रदान किया। संस्कृत रंगमण्डल के कलाकारों ने अपने सधे हुए अभिनय, भावाभिव्यक्ति और मंचीय अनुशासन से ‘नागानन्दम्’ की कथा एवं उसके मानवीय संदेश को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों तक पहुँचाया।

कार्यक्रम में भोपाल के लेखक, कलाकार, रंगकर्मी, कला-प्रेमी तथा बड़ी संख्या में युवा दर्शक उपस्थित रहे। संस्कृत रंगमण्डल के कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा।