भोपाल। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार, संपादक, लेखक एवं समाजसेवी कैलाशचंद्र पंत का शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन पर संस्कृति संचालनालय के संचालक एन.पी. नामदेव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि श्री पंत का निधन पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि श्री पंत ने निष्पक्ष पत्रकारिता, उत्कृष्ट लेखन और समाज सेवा के माध्यम से जो अमूल्य योगदान दिया, वह सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

26 अप्रैल 1936 को महू में जन्मे कैलाशचंद्र पंत ने एम.ए., साहित्याचार्य एवं साहित्य रत्न की उपाधियां प्राप्त की थीं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लेखन, संपादन और सामाजिक कार्यों को समर्पित किया। वे साप्ताहिक जनधर्म के लंबे समय तक संपादक रहे तथा वर्ष 2006 से 2021 तक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका अक्षरा का संपादन किया। इसके अलावा नवभारत और नवप्रभात जैसे समाचार पत्रों से भी जुड़े रहे। वे राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के मंत्री-संचालक रहे तथा हिंदी भवन, भोपाल के प्रमुख आधार स्तंभों में शामिल थे।

साहित्य के क्षेत्र में उनकी चर्चित कृतियों में कौन किसका आदमी, धुंध के आर-पार, शब्द का विचार पक्ष, संस्कार, संस्कृति और समाज तथा संकल्प की प्रतीक्षा में प्रमुख हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित दो महत्वपूर्ण ग्रंथों का संपादन भी किया।

भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2025 में पद्मश्री तथा मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त उन्हें विश्व हिंदी सम्मान, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता सम्मान, गणेश शंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। उनका निधन हिंदी पत्रकारिता और साहित्य जगत के लिए एक युग के अवसान के रूप में देखा जा रहा है।